Don't worry IPS Madhav Upadhyay, आरोप गंभीर लेकिन घबराने की जरूरत नहीं आईपीएस माधव उपाध्याय को - पूर्व में भी कई IPS और RPS अफसरों पर लग चुके आरोप, जेल की हवा खाने वाले अफसर भी हो गए बरी
जयपुर। वर्ष 2023 बैच के आईपीएस माधव उपाध्याय को राज्य सरकार ने एपीओ कर दिया है। हालांकि प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया गया है लेकिन सब जानते हैं कि आईपीएस माधव पर वसूली गैंग से जुड़े होने के आरोप लगे हैं। इसके बाद विभाग ने उनके खिलाफ जांच बैठाई है। आईपीएस माधव उपाध्याय को पहली पोस्टिंग भीलवाड़ा में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में मिली। पिछले आठ महीने से वे सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे थे लेकिन इसी दरमियान उन पर वसूली गैंग से मिलीभगत के आरोप लगे।
वसूली गैंग के चार सदस्य गिरफ्तार
भीलवाड़ा पुलिस ने हाल ही में अवैध खनन करने वालों से वसूली करने के मामले में भाजपा नेता अजय पांचाल सहित कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में यह भी पता चला कि अजय पांचाल लगातार आईपीएस माधव उपाध्याय और उनकी टीम में शामिल पुलिसकर्मियों के संपर्क में थे। इस वजह से आईपीएस माधव भी जांच के दायरे में आ गए। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वसूली की रकम आईपीएस माधव उपाध्याय तक पहुंच रही थी।
एसपी ऑफिस में हुई थी मुलाकात, अवैध खनन के खिलाफ कई कार्रवाइयां की
कुछ दिनों पहले भीलवाड़ा एसपी धर्मेंद्र सिंह के ऑफिस में भाजपा नेता अजय पांचाल पहुंचा था। पांचाल ने अवैध खनन के बारे में कई जानकारियां पुलिस को दी। उस दौरान एसपी ऑफिस में आईपीएस माधव उपाध्याय भी मौजूद थे। बाद में अजय पांचाल आईपीएस माधव को अवैध खनन के बारे में सूचनाएं उपलब्ध कराने लगा। आईपीएस माधव ने अपनी टीम के साथ कई खनन माफियाओं के खिलाफ पर दबिश देकर कार्रवाइयां की और अवैध खनन रुकवाया। सूचनाएं देने वाला अजय पांचाल था। ऐसे में जब अजय पांचाल पर वसूली के आरोप लगे तो आईपीएस माधव उपाध्याय को भी जांच के दायरे में ले लिया गया।
चोर, डकैत, लुटेरे और तस्कर ही देते रहे हैं सूचनाएं
अजय पांचाल द्वारा आईपीएस माधव उपाध्याय को अवैध खनन की सूचनाएं उपलब्ध कराने या दोनों का एक दूसरे के संपर्क में रहने मात्र से मिलीभगत के आरोप साबित नहीं होने वाले हैं क्योंकि गंभीर अपराधों के बारे में अक्सर पुलिस के मुखबिर आपराधिक किस्म के लोग ही होते हैं। अगर कहीं डकैती की वारदात होती है तो पुलिस जेल में बंद डकैतों से पूछताछ कर सुराग जुटाती है। मादक पदार्थों की तस्करी की सूचनाएं भी कुछ तस्कर ही पुलिस को देते हैं। आम आदमी को पता ही नहीं होता कि अफीम गांजे की तस्करी कहां और कैसे होती है।
कुछ नहीं होने वाला, पूर्व में कई अफसरों पर लग चुके आरोप
वसूली गैंग के सदस्यों से संपर्क होने के बावजूद आईपीएस माधव उपाध्याय को डरने की आवश्यकता नहीं है। कोई भी जांच कर ले, कुछ होने वाला नहीं है। वर्ष 2012 में एक ट्रेनी आईपीएस पर एक एएसआई के मार्फत एक लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप लगे थे। एएसआई को एसीबी ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया था और आईपीएस मौके से भाग छूटे उन्हें अगले दिन जयपुर के पास कानोता में पकड़ा था। गिरफ्तारी हुई और जेल भी गए लेकिन वर्ष 2018 में एएसआई और आईपीएस दोनों बरी हो गए। वर्तमान में वह आईपीएस डीआईजी रैंक के अधिकारी हैं और जयपुर में तैनात हैं।
थानों से वसूली करने वाले भी हो चुके बरी
वर्ष 2013 में राजस्थान के अजमेर जिले में पुलिस थानों से मासिक बंधी का प्रकरण सामने आया था। दलाल रामदेव ठठेरा को एसीबी की टीम ने तत्कालीन एसपी के सरकारी आवास से दो लाख रुपए की रिश्वत देते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। दलाल और एसपी के साथ तत्कालीन एडिशनल एसपी, 12 इंस्पेक्टर और दो अन्य आरोपी गिरफ्तार किए गए थे। एसपी, एडिशनल एसपी और दलाल लंबे समय तक जेल में रहे। 11 साल बाद सबूतों के अभाव में सब बरी हो गए। तत्कालीन अजमेर एसपी वर्तमान में आईजी रैंक के अधिकारी हैं जयपुर में ही तैनात हैं। तत्कालीन एडिशनल एसपी वर्तमान में एक जिले के एसपी हैं। ऐसे और भी कई प्रकरण हैं जिनमें बड़े पुलिस अधिकारी गंभीर आरोपों के बावजूद पाक साफ निकले। ऐसे में आईपीएस माधव उपाध्याय को मामूली आरोपों से डरने की आवश्यकता नहीं है।
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